RajDangar's Blog

સ્વાગત છે આપનું, ઉઘાડી આંખે જોવાતા સ્વપન ની દુનિયા માં………

वो घुंघराले बालों वाला लड़का – गोपी गोस्वामी 11/06/2010

Filed under: અવર્ગીકૃત — rajdangar @ 5:46 એ એમ (am)

उस लड़की ने अपनी दोनों आँखे बंद कर ली, अन्तिम बार अपने आराध्य को याद किया और छलांग लगाने के लिए कदम् बढ़ाया तभी उसके कानों में आवाज़ गूंजी.’संभाल के, कहीं गलती से बच मत जाना’ लड़की का हवा में लहराया कदम रूक गया. उसने अपने पैर उस निर्माणाधीन इमारत की छत की मुंडेर से वापिस खींचे और मुड़कर देखा. एक घुंघराले बालों वाला सुंदर सा युवक खड़ा मुस्कुरा रहा था. ‘कौन हो तुम’ लड़की ने पूछा ‘अभी तो कोई नहीं…लेकिन अगर तुम कूद जाती तो घटना का एकमात्र चस्मदीद गवाह होता” लड़के ने बेबाकी से उत्तर दिया. ‘व्हाट…!’ ‘जी हाँ…लेकिन लगता है, आपने अपना इरादा बदल दिया है’ ‘तुम्हें इससे क्या-?’ ‘कुछ नहीं…’ ‘तो ? ‘तो..तो..के चक्कर में मत पडिये…. और वो काम करिए..जिसके लिए आप ने इतनी सीडियाँ चढ़नेका कष्ट किया है…मेरा तो दम फूल गया था…बाप रे..कितनी उँची इमारत है…आपकी हिम्मत की दाद देनी पड़ेंगी-काश की मेरे पास कैमेरा होता’ ‘क्या मतलब?” ‘दरअसल मैं एक पत्रकार हूँ..और तुम्हारी सुसाइड की कवरेज करके….’ ‘शट आप” और दफ़ा हो जाओ’ ‘दफ़ा हो जाओ- मतलब … मुझे उर्दू जुबान का बिल्कुल भी इल्म नहीं है…बराए मेहरबानी..इसका मतलब भी बता दो’ ‘भाड़ में जाओ’ ‘ये कुछ बात समझ में आई…लेकिन उधर तो आप जा रही हैं.. मैं तो सिर्फ ये कहना चाहता था की ऐसे कूदना की सिर जमीन से पहले टकराए…अस्पताल जाने की नौबत ना आए’ लड़की को अब क्रोध आ गया था. वो लड़के के ठीक सामने आ खड़ी हुई…जो शाम के धुंधलके में अपने दोनों बाजुओं को क्रॉस बनाकर बहुत ही सहज मुद्रा में खड़ा हुआ था…उसकी आँखों में अजीब सी कशिश थी…उसके घुंघराले बालों और गौर वर्ण ने लड़की के हृदय में एकबारगी हलचल सी मचा दी.. उसने तुरन्त सयन्त होकर लड़के को घूरा…वो अब भी मुस्कुरा रहा था… ‘तुम यहाँ क्या करने आए हो?’ -लड़की ने पूछा. ‘सिगरेट पीने’, लड़के ने बेझिझक उत्तर दिया. ‘तुम्हारे हाथ में सिगरेट तो नहीं है….’ ‘जेब में है-तुम्हारे पास माचिस है?’ ‘मेरे पास क्यों होगी..और तुम यहाँ सिगरेट पीने इस इमारत की छत पर…आई डोंट बिलीव यू, सच सच बताओ तुम यहाँ क्या करने ….” ‘वही जो तुम करने आई हो…आत्महत्या…’ लड़के ने लड़की की बात खत्म होने से पहले ही कह डाला. ‘क्या….?’ ‘जी…….मैं भी… पर डरता हूँ…’ लड़की जोर से हंसी ….उसकी हंसी थी की रूक ही नहीं रही थी… लड़का शांत खड़ा देख रहा था. तो तुम मरने आए हो..अभी तो कह रहे थे तुम पत्रकार हो..लड़की ने हँसते हँसते ही पूछा. ‘क्यों क्या पत्रकार आत्महत्या नहीं करते…’ लड़की की हंसी को ब्रेक लग गया. उसने लड़के की आँखों में गंभीरता को टटोला…शायद लड़का सचमुच गंभीर था… ‘लेकिन क्यों?-लड़की अपनी जिज्ञासा को नहीं रोक पाई. ‘ये सवाल तो मुझे तुमसे पूछना चाहिए-क्योंकि मरने के लिए तो तुम मरी जा रही हो….’ ‘ ये मेरा निजी मामला है…और तुम कौन होते हो ….’ ‘ठीक है, तो आगे बदो…’ लड़के ने हाथ से आगे बढ़ने का संकेत दिया. – ‘अब की बार पीछे से आवाज़ भी नहीं दूंगा…समझी’ ‘तुम्हारे कहने से मरूंगी?’ ‘ठीक है तो फिर मत मरो’ लड़का हंसा. ‘देखो मिस्टर….अपनी मौत के बारे में फ़ैसला करने का अधिकार सिर्फ मुझे है.. समझे…और…तुम …तुम क्यों नहीं कहीं और जा कर मरते.-’ लड़की वापस मुंडेर की तरफ जाने के लिए मुडी. ‘यहाँ पहले मैं आया था…’ ‘तो फिर कूदते क्यों नहीं हो ?’ ‘डरता हूँ…’ ‘मौत से?’ ‘नहीं …जिंदगी से…अगर गिर कर बच गया …तो फिर मेरी तो जिंदगी ही बेकार हो जाएगी…एक अपाहिज ..की जिंदगी …ये कितना भयानक होगा…मौत से भी बदतर जिंदगी’ लड़के ने आह भरी. लड़की भी इस भयावह सच्चाई की कल्पना मात्र से सिहर उठी. कुछ क्षण मौन रहने के पश्चात लड़की एक बनावटी द्रडता चेहरे पर लाती हुई कठोरता से बोली -’तुम मुझे डराने की कोशिश कर रहे’ ‘तुम डर रही हो?’-लड़के के स्वर में उपहास का पुट था. ‘नहीं…’ लड़की को खुद अहसास हो गया कि उसके नहीं में कहीं से चुपके से डर ने सैन्ध लगा दी थी. ‘ तुम यहाँ से जाओं…भगवान के लिए मुझे अकेला छोड़ दो’ लड़की के स्वर में प्रार्थना थी. ‘भगवान…मतलब यहॉं कोई भगवान नाम का तुम्हारा बॉय फ्रेंड….’ ‘तुम्हारा दिमाग खराब है…’ लड़की चिल्ला कर बोली. ‘सॉरी…भगवान से मतलब तुम्हारा उपरवाले से है…कितनी अजीब बात है उपरवाले से मिलने के लिए तुम नीचे जाना चाहती हो ..वो भी कूद कर’ लड़की खामोश हो गई. ‘क्या सोच रही हो?’ लड़के को शायद लड़की का चुप रहना अच्छा नहीं लगा था. लड़की खामोश ही रही. ‘यदि हिम्मत नहीं हो रही है…तो मैं कुछ मदद करू’ लड़के ने कहा. ‘तुम क्या करोगे’ ‘गिनती गिनूंगा..एक..दो. तीन’ ‘शट अप’ ‘अच्छा..चलो ये बताओ कि तुम मरना क्यों चाहती हो’ लड़की फिर से चुप हो गई. ‘एग्जाम में फेल हो गई हो…?’ लड़की ने आँखें तरेर कर देखा. ‘सौतेली मौ के व्यवहार से तंग हो ?’ लड़की चुप ‘कोई ऐसी वैसी बीमारी….?’ ‘तुम पागल हो’ लड़की ने गुस्से से चीख कर बोला. ‘तो फिर …किसी प्रेम प्रसंग का मामला है-मेरा मतलब प्यार में धोखा?’ लड़के ने फुसफुसाते हुए लड़की के एकदम करीब आकर पूछा. लड़की ने सिर झुका लिया. ‘मुझे पता था…यही बात है…नाइंटी पर्सेंट केसस में ऐसा ही होता है’ लड़के ने जैसे जीत का एलान कर दिया था. लड़की ने अचानक दोनों हाथों से अपना चेहरा ढक लिया और फफक फफ्क कर रोने लगी.लड़का शायद इस तरह् की प्रतिक्रिया की अपेक्षा नहीं कर रहा था. वह लड़की के निकट गया और बोला. ‘देखिए, आप जरा ये हाथों का परदा हटाइए…इस तरह् के आँसू एक बहादुर लड़की की आँखों से बहे …ये कुछ ठीक नहीं है…’ लड़की पूर्ववत रोए जा रही थी. ‘चलिए…थोड़ी देर रो ही लीजिए. मरने से पहले थोड़ा सा गम हल्का हो जाएगा..’ लड़की ने मुँह घुमाकर दुपट्टे से अपनी आँखों को पोछा और वापिस लड़के की तरफ़ घूमी जो निर्विकार भाव से उसकी तरफ घूर रहा था…सफेद रंग की कमीज़ और नीले रंग की जींस में खड़ा हुआ लड़का अपने घुंघराले बाल, गौरवर्ण और लंबे उँचे कद के कारण एक पल में किसी फिल्मी हीरो का सा अहसास देता था. ‘मुझे तुम पर दया आ रही है..वैसे अगर तुम कहो तो में तुम्हारी मदद कर सकता हूँ’ ‘कैसी मदद?’ ‘पहले गिनती गिनने को तैय्यार था अब तुम्हें आत्महत्या के पाप से बचाने के लिए ..धक्का दे सकता हूँ’ ‘तुम्हारी मेहरबानी की जरूरत नहीं है…समझे ..और जाकर अपने दिमाग का इलाज कराओ-तुम आखिर चाहते क्या हो?’ ‘अरे! में तो तुम्हारी मदद करने की कोशिश कर रहा हूँ. और वैसे भी थोड़ी देर बाद अंधेरा हो जाएगा..ऐसे काम जितनी जल्दी निपट जाएँ उतना ही अच्छा है..बहुत सी फॉरमॅलिटीस करनी पड़ती हैं.पुलिस केस बनेगा, पोस्टमार्टम होगा, टीवी चॅनेल्स वाले तुम्हारे माँ-बाप का रोना धोना कैमरे में कैद करेंगे..तुम्हारे अन्तिम संस्कार कि रस्म…..’ ‘बंद करो ये सब….-तुम कैसे निर्दयी इंसान हो..जो मुँह में आता है बक देते हो’-लड़की ने गुस्से में तमतमाते हुए लगभग चीख़ते हुए कहा. ‘लेकिन मैं तो वो हकीकत एडवांस में तुम्हारे सामने रख रहा हूँ..जो सत्य होने वाली है-कल सुबह के लोकल अखबारों की हेडलाइन्स होगी. “नर्मदा अपार्टमेंट की छत से कूद कर एक युवती ने जान दी-दस दिनों के भीतर आत्महत्या की यह दूसरी घटना’”. ‘दूसरी घटना..क्या मतलब’ ‘क्यों अखबार नहीं पढ़ती?’ ‘क्या सचमुच यहाँ से कूद कर किसी ने जान दी थी..कोई लड़की थी?’ ‘नहीं, एक लड़का था ..बेचारा…’लड़के ने एक आह भरी और लड़की की तरफ़ देखा जिसके चेहरे पर घबराहट और बैचेनी साफ नजर आ रही थी. ‘तुम उसकी छोड़ो..और अपना काम करो’ ‘तुम मेरे पीछे क्यों पड़े हो..आखिर तुम मुझे क्यों मारना चाहते हो?’ ‘मैं तुम्हें मारना चाहता हूँ? …अरे! तुम खुद कूद रही थी ..वो तो मैने तुम्हे टोका था बस ..में तो यही चाहता था कि कहीं कसर न रह जाए…’ ‘लेकिन ..अब मैंने अपना इरादा बदल दिया है’-लड़की ने कहा. ‘ये आप गलत कर रहीं हैं मैडम.’ ‘क्यों?’ ‘मेरा मतलब ..अभी मरने से इनकार, कल फिर जीने से इनकार और फिर मरने के लिए दोबारा तैयार …ये कुछ अजीब सा नहीं है.’ लड़के ने नाटकीय अंदाज में कहा. ‘मैं…मैं कुछ समझ नहीं पा रही हूँ…मैं क्या करू…मेरे साथ उसने ऐसा किया…मैं कहीं की नहीं रही…मरना तो चाहती हूँ..पर तुमने जो कुछ कहा उसके बाद… मेरी हिम्मत नहीं हो रही है…’ लड़का जोर जोर से हँसने लगा. ‘तुम..तुम हंस रहे हो?’ ‘तुम्हारे इरादे को नाप रहा था…मुझे लगता है कि तुम्हारे अंदर जीने की इच्छा बहुत बाकी है…लेकिन उस प्रेम चोपड़ा ब्रांड तुम्हारे बॉय फ्रेंड ने तुम्हारे साथ जो किया उसके बाद तुम्हें अपने आप से नफरत हो रही है..बोलो ठीक हैं ना? ‘तुम ठीक कहते हो…मुझे अब उस लड़के से नफरत हो गई है…उसने मेरे साथ खिलवाड़ किया और अब किसी और से शादी कर रहा है…मैने उस पर विश्वास किया..पर…’ लड़की फिर से रोने लगी थी. ‘देखो….मैं तुम्हारी राम कहानी नहीं सुनना चाहता…तुम कौन हो..वो कौन था..तुम्हारे साथ क्या हुआ..ये सब छोड़ो…केवल इतना कहना चाहता हूँ कि यदि समस्याओं का समाधान आत्महत्या होता तो शायद ये दुनिया कभी की खत्म हो गई होती’ ‘शायद तुम ठीक कह रहे हो..पर अब मैं अपने आप को पराजित सा महसूस कर रही हूँ..मेरे भीतर का तूफान ही मुझे यहाँ तक ले आया…मेरे परिवार वाले मेरा इंतजार कर रहे होंगे और मैं यहाँ…’ ‘घबराओ नहीं …अब तुम्हारी भीतर का तूफान शांत हो गया है” लड़के ने किसी दार्शनिक के लहजे में कहाँ शुरू किया- ‘दरअसल, मौत एक कुँआ है.जिंदगी और मौत के बीच में सिर्फ दो कदम का फासला है…पहला कदम् उठा कर वापिस खींचा जा सकता है…लेकिन यदि दूसरा कदम् भी उठ गया तो…जिंदगी खत्म. तुम भी वही करने जा रही थी.. तुम पहला कदम बढ़ा चुकी थी…लेकिन तुम्हार दूसरा कदम मैने रोक दिया-अब तुम्हारे भीतर से जिंदगी फिर से तुम्हें पुकार रही है…उसकी आवाज़ सुनो…जिंदगी तुम्हारी कल्पना से भी कहीं ज्यादा सुंदर है….बोलो है ना सुंदर…?’ ‘तुम ठीक कहते हो..’ लड़की के भीतर कहीं से शांत लहरें उठ उठ कर उसके रोम रोम को भिगो रही थी. ”और, तुम किस पाप की बात कर रही हो…अंतरंग प्रेम के वे क्षण तुम्हारे विश्वास और तुम्हारे समपर्ण की उँचाई थी…और तुम्हारे प्रेमी के लिए केवल वासना का एक खेल….तुम निश्छ्ल थी तभी तो तुम्हारे साथ छ्ल हुआ…एक व्यक्ति के धोखे की सजा तुम अपने पूरे परिवार को दे रही हो…और शायद उन बेचारों को भी जो तुम्हें देख देख कर जी रहे होंगे…अच्छी खासी खूबसूरत जो हो…’ अन्तिम वाक्य सुनकर लड़की के चेहरे पर मुस्कान फेल गई….डूबते हुए सूरज की लाली और मुस्कान से खिला उसका चेहरा सचमुच भला सा लग रहा था. ‘तुमने अपने बारे में कुछ नहीं बताया तुम्हारा नाम क्या है और तुम यहाँ क्या कर रहे हो?’ ‘मेरा नाम तुम अपनी सुविधा के हिसाब से कुछ भी रख सकती हो लेकिन में चाहूँगा की तुम मुझे ऋतिक रोशन बोलो ” लड़की ने जोर से ठहाका लगाया. ‘तुम मजाक बहुत अच्छा कर लेते हो’ ‘वो तो ठीक है… लेकिन चलो अब में तुम्हें नीचे तक छोड़ देता हू’ ‘छोड़ देता हूँ मतलब….तुम नहीं जाओगे?’ ‘मैं इस इमारत का चौकीदार हूँ’ लड़के ने कहा. ‘सौ झूठे मरे होंगे जब तुम पैदा हुए…तुम जो कोई भी हो लेकिन सच कहूँ …मेरे लिए तो देवदूत हो’ लड़की ने दोनो हाथ जोड़ दिए. अब वे इमारत कि सीडियाँ उतर रहे थे. लड़का अब बिल्कुल खामोश था. लड़की को उसकी खामोशी बैचेन कर रही थी. ‘तुम कुछ बोल नहीं रहे हो?’ ‘तुम वापस लौट रही हो, और प्रॉमिस करो कि जीवन में कभी भी ऐसा विचार मन में नहीं लाओगी जो तुम्हें फिर से इस मनहूस बिल्डिंग कि तरफ ले आए’ ‘मैं वचन देती हूँ तुमने मुझे जीवन का सबक सिखाया है काश कि उस लड़के को भी तुमहरे जैसा कोई देवदूत मिला होता जो उसे रोकता उसके बारे में तुम ने कुछ नहीं बताया?. ‘संभाल के इस बिल्डिंग की सीडियाँ कहीं कहीं टूटी हुई हैं… और अंधेरा भी होने को है’ लड़के ने लड़की से कहा जो बार पीछे मुड़ कर उसकी ओर देख रही थी. ‘कितनी उँची है ये बिल्डिंग वो लड़का तो ओन दी स्पॉट मार गया होगा ना ?’ ‘हाँ’ लड़के ने उत्तर दिया. ‘लेकिन क्यों किया उसने?’ ‘वो भी तुम्हारी तरह मौत और जिंदगी कि कश्मकश से जूझ रहा था लेकिन मौत जीत गई उसका वो दूसरा कदम उठ गय..किसी ने उसे नहीं रोका पीछे से आवाज़ नहीं दी…उसके भीतर का तूफान उसे मौत के अंधेरों में ले गया ‘ ‘पर क्यों जान दी उसने?’ ‘एक लड़की थी वजह’ ‘लड़की?’ ‘हाँ वो लड़की दिखने में सुंदर तो नहीं थी पर ना जाने कैसे उस लड़के के भीतर… उसकी आत्मा में प्रवेश कर गई. उसकी सादगी उसका भोला सा चेहरा उसके चेहरे की गंभीरता सब कुछ ऐसा था कि लड़का दीवाना सा हो गया. लड़के का इंजीनीरिंग का आखिरी साल थ..घर में रिटायर्ड पिता और मौ के अलावा दो छोटी बहने भी थी. वो लड़की का अक्सर पीछा करता था उसकी एक झलक पाने के लिए बैचेन रहता था. लड़की के साथ शादी के सपने संजोने लगा था. एक दिन उसने फ़ैसला किया कि वो लड़की से जाकर अपने दिल कि बात कहेगा. ‘ -कुछ देर खामोशी रही . अब वे दोनों इमारत के नीचे खड़े थे. ‘लो हम नीचे आ गये’ लड़के ने मुस्कुरा कर लड़की की और देखा. ‘आगे बताओ ना. फिर क्या हुआ ?’ ‘कहानी मजेदार है?’ ‘तुमने तो कहा था कि कोई लड़का सचमुच वहाँ से ओ माइ गोद कितनी उँची बिल्डिंग है .सच कहो ये कहानी है या सच्चाई? ‘एक सच्ची कहानी है’-लड़के ने कहा ‘आगे नहीं सुनोगी?’ ‘सच है ये तो प्लीज़ सुनाओ फिर क्या हुआ?’ ‘फिर ‘ ‘लड़के ने कहना शुरू किया ‘फिर एक दिन उसने फ़ैसला किया कि वो लड़की को सब कुछ कहेगा अपने दिल कि बात कहेगा वो कहेग..कि वो उस से शादी करना चाहता है’ ‘उसने कहा उस से?’ ‘नहीं पर जब उस ने लड़की का रास्ता रोका तो वो लड़की जैसे फट पड़ी और गुस्से से बोली, ‘में इसी दिन का इंतज़ार कर रही थी कि कब तुम मेरे सामने आओ और मैं कहूँ कि में तुम से प्यार नहीं करती हूँ समझे तुम हमेशा मेरा पीछा करते रहते हो समझते क्या हो तुम अपने आप को में तुम्हें नहीं चाहती हूँ और सुनो ..अगले हफ्ते मुझे देखने लडकेवाले देखने आ रहें हैं वो लड़का तुम्हारी तरह हॅंडसम तो नहीं है..पर ठीक ठाक है अच्छी नौकरी करता है मुझे पसंद है और तुम ..तुम चाहे किसी बिल्डिंग से कूद कर भी मर जाओ तो भी में उफ नहीं करूंगी .हटो मेरे रास्ते से .’ ‘ऐसा कहा उस लड़की ने?’ ‘हाँ लड़के कि आँखों के सामने अंधेरा छा गया और .उसके भीतर एक तूफान उठा क्रोध, ग्लानि अपमान और निराशा से भरा वो लड़का इस बिल्डिंग कि छत पर पहुँचा .अपने विवेक से उसका नियंत्रण खत्म हो गया था और फिर उसने पहला कदम उठाया और फिर दूसरा कदम और फिर मौत’ ‘उस लड़की का क्या हुआ’ ‘पता नहीं लेकिन लड़के के बारे में बता सकता हूँ कि… मौत के बाद भी उसे मुक्ति नहीं मिली .वो अब भी इस इमारत कि उंचाइयों में भटक रहा है ..’ ‘क्या मतलब ? -उसकी आत्मा ‘ ‘हाँ उसकी आत्मा अब भी भटक् रही है ‘ ‘मुझे विश्वास नहीं होत..तुम झूठ बोल रहे हो’- लड़की के चेहरे पर अविश्वास और भय था ‘कोई लड़का यहाँ से कूदा उसकी कहानी भी सच हो सकती है..पर उसकी आत्मा यहाँ इस इमारत कि छत पर तुम झूठ बोल रहे हो..’ ‘यकीन नहीं होता तो. थोड़ा आगे बढ़ो ‘ लड़के ने कहा. लड़की आगे की और गई.. लड़का वहीं खड़ा रहा ‘थोड़ा और आगे ‘ लड़की थोड़ा और आगे बढ़ी. ‘अब उपर देखो’ ‘लड़के ने जोर से आवाज़ देकर कहा. लड़की ने उपर देखा उसके जैसे होश उड़ गये वहाँ सचमुच कोई था .छत पर .उसने सफेद रंग कि कमीज़ पहनी थी .लड़की तुरंत पीछे घूमी उसकी आँखें फटी रह गई वो घुंघराले बालों वाला लड़का वहाँ नही था ..चारों तरफ सन्नाटा पसरा हुआ था ..उसने फिर उपर देखा वो वहाँ थ..उपर ….उस इमारत की छत पर…. मौत और मुक्ति के बीच कि कश्मकश में भटकता हुआ वो घुंघराले बालों वाला लड़का.

……….गोपी गोस्वामी………

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6 Responses to “वो घुंघराले बालों वाला लड़का – गोपी गोस्वामी”

  1. हिन्दी ब्लॉगजगत के स्नेही परिवार में इस नये ब्लॉग का और आपका मैं ई-गुरु राजीव हार्दिक स्वागत करता हूँ.

    मेरी इच्छा है कि आपका यह ब्लॉग सफलता की नई-नई ऊँचाइयों को छुए. यह ब्लॉग प्रेरणादायी और लोकप्रिय बने.

    यदि कोई सहायता चाहिए तो खुलकर पूछें यहाँ सभी आपकी सहायता के लिए तैयार हैं.

    शुभकामनाएं !

    “टेक टब” – ( आओ सीखें ब्लॉग बनाना, सजाना और ब्लॉग से कमाना )

  2. shobha Says:

    ब्लाग जगत में आपका स्वागत है।
    अति सुन्दर।

  3. ” बाज़ार के बिस्तर पर स्खलित ज्ञान कभी क्रांति का जनक नहीं हो सकता ”

    हिंदी चिट्ठाकारी की सरस और रहस्यमई दुनिया में राज-समाज और जन की आवाज “जनोक्ति.कॉम “आपके इस सुन्दर चिट्ठे का स्वागत करता है . चिट्ठे की सार्थकता को बनाये रखें . अपने राजनैतिक , सामाजिक , आर्थिक , सांस्कृतिक और मीडिया से जुडे आलेख , कविता , कहानियां , व्यंग आदि जनोक्ति पर पोस्ट करने के लिए नीचे दिए गये लिंक पर जाकर रजिस्टर करें . http://www.janokti.com/wp-login.php?action=register,
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  4. डॉ. पुरुषोत्तम मीणा, राष्ट्रीय अध्यक्ष Says:

    खुद्दार एवं देशभक्त लोगों का स्वागत है!
    सामाजिक क्षेत्र में कार्य करने वाले हर व्यक्ति का स्वागत और सम्मान करना प्रत्येक भारतीय नागरिक का नैतिक कर्त्तव्य है। इसलिये हम प्रत्येक सृजनात्कम कार्य करने वाले के प्रशंसक एवं समर्थक हैं, खोखले आदर्श कागजी या अन्तरजाल के घोडे दौडाने से न तो मंजिल मिलती हैं और न बदलाव लाया जा सकता है। बदलाव के लिये नाइंसाफी के खिलाफ संघर्ष ही एक मात्र रास्ता है।

    अतः समाज सेवा या जागरूकता या किसी भी क्षेत्र में कार्य करने वाले लोगों को जानना बेहद जरूरी है कि इस देश में कानून का संरक्षण प्राप्त गुण्डों का राज कायम होता जा है। सरकार द्वारा जनता से टेक्स वूसला जाता है, देश का विकास एवं समाज का उत्थान करने के साथ-साथ जवाबदेह प्रशासनिक ढांचा खडा करने के लिये, लेकिन राजनेताओं के साथ-साथ भारतीय प्रशासनिक सेवा के अफसरों द्वारा इस देश को और देश के लोकतन्त्र को हर तरह से पंगु बना दिया है।

    भारतीय प्रशासनिक सेवा के अफसर, जिन्हें संविधान में लोक सेवक (जनता के नौकर) कहा गया है, व्यवहार में लोक स्वामी बन बैठे हैं। सरकारी धन को भ्रष्टाचार के जरिये डकारना और जनता पर अत्याचार करना प्रशासन ने अपना कानूनी अधिकार समझ लिया है। कुछ स्वार्थी लोग इनका साथ देकर देश की अस्सी प्रतिशत जनता का कदम-कदम पर शोषण एवं तिरस्कार कर रहे हैं। ऐसे में, मैं प्रत्येक बुद्धिजीवी, संवेदनशील, सृजनशील, खुद्दार, देशभक्त और देश तथा अपने एवं भावी पीढियों के वर्तमान व भविष्य के प्रति संजीदा व्यक्ति से पूछना चाहता हूँ कि केवल दिखावटी बातें करके और अच्छी-अच्छी बातें लिखकर क्या हम हमारे मकसद में कामयाब हो सकते हैं? हमें समझना होगा कि आज देश में तानाशाही, जासूसी, नक्सलवाद, लूट, आदि जो कुछ भी गैर-कानूनी ताण्डव हो रहा है, उसका एक बडा कारण है, भारतीय प्रशासनिक सेवा के भ्रष्ट अफसरों के हाथ देश की सत्ता का होना।

    शहीद-ए-आजम भगत सिंह के आदर्शों को सामने रखकर 1993 में स्थापित-“भ्रष्टाचार एवं अत्याचार अन्वेषण संस्थान” (बास)- के सत्रह राज्यों में सेवारत 4300 से अधिक रजिस्टर्ड आजीवन सदस्यों की ओर से मैं दूसरा सवाल आपके समक्ष यह भी प्रस्तुत कर रहा हूँ कि-सरकारी कुर्सी पर बैठकर, भेदभाव, मनमानी, भ्रष्टाचार, अत्याचार, शोषण और गैर-कानूनी काम करने वाले लोक सेवकों को भारतीय दण्ड विधानों के तहत कठोर सजा नहीं मिलने के कारण आम व्यक्ति की प्रगति में रुकावट एवं देश की एकता, शान्ति, सम्प्रभुता और धर्म-निरपेक्षता को लगातार खतरा पैदा हो रहा है! क्या हम हमारे इन नौकरों (लोक सेवक से लोक स्वामी बन बैठे अफसरों) को यों हीं सहते रहेंगे?

    जो भी व्यक्ति इस संगठन से जुडना चाहे उसका स्वागत है और निःशुल्क सदस्यता फार्म प्राप्त करने के लिये निम्न पते पर लिखें या फोन पर बात करें :
    डॉ. पुरुषोत्तम मीणा, राष्ट्रीय अध्यक्ष
    भ्रष्टाचार एवं अत्याचार अन्वेषण संस्थान (बास)
    राष्ट्रीय अध्यक्ष का कार्यालय
    7, तँवर कॉलोनी, खातीपुरा रोड, जयपुर-302006 (राजस्थान)
    फोन : 0141-2222225 (सायं : 7 से 8) मो. 098285-02666
    E-mail : dr.purushottammeena@yahoo.in

  5. rajbir goswami Says:

    sachmuch achhi kahaani hai . very fine.


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